हरियाणा,19 अगस्त,2026 (संजीव शर्मा): रात का समय है। मुख्यमंत्री आवास ‘संत कबीर कुटीर’ पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के सामने हाथों में कागज लिए लोग अपनी समस्याएं और उम्मीदें लेकर खड़े हैं। किसी को अपनी बेटी के भविष्य की चिंता है, कोई परिवार की आर्थिक परेशानी लेकर आया है, तो कोई सरकारी योजना का लाभ मिलने की उम्मीद लगाए बैठा है। समय आगे बढ़ता जाता है, लेकिन मुलाकातों का सिलसिला थमता नहीं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी एक-एक करके लोगों से मिलते हैं। चेहरे पर सहज मुस्कान, सामने खड़े व्यक्ति की बात ध्यान से सुनना और समस्या के समाधान के लिए अधिकारियों को तुरंत निर्देश देना—यह दृश्य अब हरियाणा में मुख्यमंत्री और आम जनता के बीच सीधे संवाद की पहचान बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री और आम जनता के बीच यह सीधा संवाद सरकार की जनकल्याणकारी सोच को योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन से जोड़ रहा है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा सरकार ने सामाजिक सुरक्षा और जनकल्याण को केवल बजट घोषणाओं तक सीमित रखने के बजाय उन्हें पात्र लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव का माध्यम बनाने पर जोर दिया है। महिलाओं से लेकर वरिष्ठ नागरिकों और नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों तक, सरकार की कई पहल इसी सोच को आगे बढ़ा रही हैं।
एक योजना, लाखों महिलाओं के लिए आर्थिक सहारा
हरियाणा की महिलाओं के लिए ‘दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना’ आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बनकर सामने आई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने योजना का दायरा बढ़ाते हुए पात्रता के लिए वार्षिक आय सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.80 लाख रुपये करने की घोषणा की है। यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आय सीमा बढ़ने से बड़ी संख्या में अतिरिक्त महिलाएं योजना के दायरे में आ सकेंगी।
योजना के तहत वर्तमान में लगभग 10 लाख महिलाओं को प्रति माह 2,100 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है।
सरकार के लिए अब केवल सहायता देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि कोई पात्र महिला जानकारी, दस्तावेज या आवेदन प्रक्रिया की जटिलता के कारण लाभ से वंचित न रह जाए। इसी उद्देश्य से पात्र महिलाओं का डेटा एकत्र करने, बैंक खातों का सत्यापन, आवेदन प्रणाली में आवश्यक बदलाव और व्यापक जन-जागरूकता अभियान की कार्ययोजना तैयार की गई है।
इस पहल के पीछे संदेश स्पष्ट है कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल योजनाओं में नाम जोड़ना नहीं, बल्कि महिलाओं को आर्थिक फैसले लेने में अधिक सक्षम बनाना है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा है कि दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना का लाभ लेने वाली किसी भी मां, बहन या बेटी को किसी अन्य योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जाएगा।
बुजुर्गों के लिए घर तक पहुंचेगी देखभाल
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने समाज की अनुभवी पीढ़ी के लिए भी नई सोच के साथ कदम उठाया है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर पर देखभाल और प्राथमिक चिकित्सा सहायता की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रदेश में 1,000 केयर गिवर्स तैयार किए जाएंगे।
यह पहल उस बदलती सामाजिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए की गई है, जहां कई वरिष्ठ नागरिकों को घर पर ही नियमित देखभाल और सहयोग की आवश्यकता होती है।
इसके साथ ही प्रदेश में ‘सीनियर सिटीजन वेलफेयर क्लब’ स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य केवल स्वास्थ्य संबंधी सहायता देना नहीं, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों को सामाजिक जुड़ाव, सम्मान और सुरक्षा का बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री का संदेश स्पष्ट है—वरिष्ठ नागरिक समाज पर बोझ नहीं, बल्कि अनुभव और संस्कारों की अनमोल धरोहर हैं।
देखभाल करने वालों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल की इस व्यवस्था को मजबूत आधार देने के लिए विश्वकर्मा स्किल यूनिवर्सिटी और ओ.पी. जिंदल यूनिवर्सिटी को प्रशिक्षण संस्थानों के रूप में चिन्हित किया गया है।
इन संस्थानों में दो चरणों में 500-500 प्रशिक्षुओं को तैयार करने की योजना है। प्रशिक्षण में युवाओं और महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। यानी एक पहल से दो उद्देश्यों को पूरा करने का प्रयास है—वरिष्ठ नागरिकों को प्रशिक्षित देखभालकर्ता उपलब्ध कराना और युवाओं तथा महिलाओं के लिए नए कौशल एवं रोजगार के अवसर पैदा करना।
नशे के खिलाफ लड़ाई अब इलाज से पुनर्वास तक
नशे की समस्या से प्रभावित लोगों के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने केवल कार्रवाई और रोकथाम तक सीमित रहने के बजाय उपचार, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्स्थापना की दिशा में भी पहल की है।
मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के माध्यम से नशा मुक्ति के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की घोषणा की है। इसके लिए कुरुक्षेत्र में स्थान का निरीक्षण किया जा चुका है और आधुनिक सुविधाओं से युक्त केंद्र विकसित करने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जा रहा है।
इस केंद्र का उद्देश्य नशे से प्रभावित लोगों को उपचार उपलब्ध कराने के साथ उन्हें दोबारा सामान्य सामाजिक जीवन से जोड़ना होगा। यह सोच में बदलाव का संकेत है—नशे से प्रभावित व्यक्ति को केवल समस्या के रूप में नहीं, बल्कि उपचार और अवसर के हकदार व्यक्ति के रूप में देखना।
योजनाओं से आगे, लाभार्थी तक पहुंचने की चुनौती
किसी भी सरकार के लिए सबसे बड़ी सफलता केवल योजना की घोषणा करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उसका लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इसी अंतिम छोर पर विशेष जोर दे रहे हैं।
पात्र लाभार्थियों का डेटा एकत्र करना, बैंक खातों का सत्यापन, आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाना और जन-जागरूकता बढ़ाना इसी दिशा में उठाए जा रहे कदम हैं।
सरकार का प्रयास, योजना और लाभार्थी के बीच की दूरी हो कम
नायब सिंह सैनी का चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री आवास पर देर रात तक आम जनता से मिलना और प्रदेशभर में लागू की जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। एक ओर मुख्यमंत्री सीधे लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार उन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए नीतियां और योजनाएं तैयार कर रही है।
महिलाओं को आर्थिक सहारा, वरिष्ठ नागरिकों को घर पर देखभाल, युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और नशे से प्रभावित लोगों को पुनर्वास का अवसर—इन सभी पहलों में एक साझा सूत्र दिखाई देता है। सरकार का फोकस केवल सहायता देने पर नहीं, बल्कि लोगों को सम्मानजनक और बेहतर जीवन देने पर है।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी का विजन भी इसी व्यापक सोच से जुड़ा हुआ है। उनका लक्ष्य वर्ष 2047 के विकसित भारत के संकल्प के साथ हरियाणा को भी एक विकसित और सशक्त राज्य के रूप में आगे ले जाना है। इस यात्रा में विकास का अर्थ केवल सड़क, भवन और उद्योग तक सीमित नहीं, बल्कि ऐसा समाज बनाना भी है जहां महिला आर्थिक रूप से मजबूत हो, बुजुर्ग सम्मान के साथ जीवन जी सकें और नशे से प्रभावित युवाओं को मुख्यधारा में लौटने का अवसर मिले।
यही वह बदलाव है, जहां सरकारी घोषणा कागज से निकलकर किसी परिवार की जिंदगी में उम्मीद बनती है और जनकल्याण वास्तव में जनता के जीवन की भलाई में बदलता है।






