कुरुक्षेत्र, 23 अगस्त,2026 (संजीव शर्मा): मध्य प्रदेश की समिति के सभापति एवं विधानसभा सदस्य ठाकुर दास नागवंशी ने कहा कि मध्य प्रदेश में उच्च पैदावार और उत्तम गुणवत्ता की गेहूं उगाने के बावजूद भी पराली जलाने के मामलों को नियंत्रित करने में मध्य प्रदेश की सरकार इतना समर्थ नहीं रही है। लेकिन हरियाणा प्रदेश में फसल अवशेष प्रबंधन पर सराहनीय कार्य किया गया है। इस प्रदेश में वर्ष 2018 में पराली जलाने के 901 केस सामने आए जबकि वर्ष 2025 में यह आंकड़ा सिमट कर 12 पर रह गया। इसके लिए हरियाणा प्रदेश सरकार और कृषि विज्ञान केन्द्र बधाई के पात्र है।

विधानसभा सदस्य ठाकुर दास नागवंशी शनिवार को कृषि विज्ञान केंद्र कुरुक्षेत्र में कृषि विज्ञान केन्द्र की तरफ से आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार और चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार फसल अवशेष का सही तरीके से प्रबंधन करने के लिए बधाई का पात्र है और इस क्षेत्र में मध्य प्रदेश को भी पीछे छोड दिया है। इस प्रदेश में कृषि के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों, मेहमान नवाजी और सरकार के फसल अवशेष प्रबंधन के लिए बनाए गए नियमों की रूप रेखा और सबसिडी इत्यादि को देखकर प्रतिनिधि मंडल बहुत प्रभावित हुआ है। इन तमाम तथ्यों और विषयों को मध्य प्रदेश सरकार के समक्ष रखा जाएगा और फसल अवशेष प्रबंधन को सुचारू रूप से करने के लिए प्रस्ताव रखेंगे।
इस कार्यक्रम का आयोजन चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कुलपति प्रोफेसर वीआर काम्बोज के मार्गदर्शन व दिशा निर्देश के अनुसार कृषि विज्ञान केंद्र कुरुक्षेत्र द्वारा विश्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. नरेश कौशिक की देखरेख में किया गया। इस अवसर पर समिति के सभापति एवं विधानसभा सदस्य ठाकुरदास नागवंशी ने विधानसभा के अन्य सदस्यों महेंद्र रामसिंह यादव,नीलेश उईके, एडिशनल सेक्रेटरी उमेश शर्मा, अंडर सेक्रेटरी महावीर सिंह, नोडल अधिकारी समीर पटेल तथा हरियाणा विधानसभा के प्रोटोकॉल अधिकारी संजीव शर्मा के साथ कार्यक्रम में शिरकत की।
विश्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. नरेश कौशिक ने पुष्प गुच्छ देकर अतिथियों का स्वागत किया। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रांगण में आयोजित इस कार्यक्रम में सह-निदेशक, कृषि परामर्श सेवा, डॉ. एस. के. ढांडा ने मंच का संचालन किया। विश्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशालय की संगठनात्मक संरचना, क्रियाकलापों तथा कृषि विज्ञान केंद्र, प्रमुख उपब्धियों और प्रसार पहलुओं पर कृषि विज्ञान केंद्र, यमुनानगर के समन्वयक डॉ. संदीप रावल ने एक व्यापक प्रस्तुति दी, जिसमें विशेष रूप से फसल अवशेष प्रबंधन, किसानों के लिए तकनीकी मूल्यांकन, प्रदर्शन और हस्तांतरण का अवलोकन किया गया। फसल अवशेष प्रबंधन पर केंद्रित इस प्रस्तुति में इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन, कृषि मशीनरी, कन्टम हायरिंग सेंटर और 2018 से अब तक जिले में पराली जलाने के मामलों की स्थिति, पराली जलाने की रोकथाम के लिए कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किए गए किसान मेलों, अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन, किसान प्रशिक्षण, ग्राम, खंड तथा जिला स्तरीय जागरूकता कार्यक्रम, स्कूल व कॉलेजों के विद्यार्थियों के लिए आयोजित किए गए जागरूकता कार्यक्रमों की विस्तार से तथ्यों के साथ जानकारी दी गई।
समिति के एडिशनल सेक्रेटरी उमेश शर्मा ने कुरुक्षेत्र जिले में फसल विविधीकरण, धान की सीधी बिजाई, जल संरक्षण, जलवायु-प्रतिरोधी और जल उपयोग दक्षता के बारे में भी विस्तार से जानकारी एकत्रित की। आईओसीएल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अजय शर्मा ने सभी का आभार प्रकट किया। इस मौके पर डॉ. मनोज कुमार, डॉ. फतेह सिंह, डॉ. अश्विनी कुमार, डॉ. ललिता रानी, डॉ. सरिता रानी, डॉ. कविता तथा केंद्र के सभी कर्मचारी भी कार्यक्रम में उपस्थित थे।






